Sujangarh

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Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Location of Sujangarh in Churu district
Location of Sujangarh in Churu district

Sujangarh (सुजानगढ़) is the name of a city and a tahsil in Churu district of Rajasthan. Its old name was Guleriyon Ki Dhani (गुलेरियों की ढ़ाणी).

Founders

Variants of name

History

Early History: It is said that during the Mahabharata period this tract of land was the land of Guru Draunacharya. Later on it was called as Chanderi, the Capital of Shishupala. It was also called Bhompura.[1]In the 8th generation of the Mirhas there lived a king called Mahit. His descendants were called Mahi, Mahe.

In about the first century AD, Dronapura (द्रोणपुर) or Dronaka (द्रोनक) the site some where near present Sujangarh, was the capital of Mahe Kings. Chhapar city located in Sujangarh tahsil of Churu district of Rajasthan has been identified with the ancient Dronapura (द्रोणपुर) or Dronaka (द्रोनक).[2] Dalip Singh Ahlawat writes that Chhapar was capital of Mohil Jats prior to Rathores.[3]

The present Sujangarh town exists on the site of a village that was earlier known as Kharbuji Kot, deriving the name from the person named Kharbuji. It also had a Cemetery before it was set up.

The earliest name of Sujangarh was Gulerion Ki Dhani. Guleria Jats migrated in 1573 AD from Ladariya Nagaur and founded Gulerion Ki Dhani which later became Kot Kharbuja and finally Sujangarh.[4] Kot Kharbuja(खरबूजाराकोट) changed to Sujangarh after Sujan Singh who became ruler of Bikaner[5] in 1737 AD.[6] It was a district under Mohil Jat rulers with capital at Chhapar prior to the rule of Rathores. [7]


History of Sujangarh is associated with the History of Guleria clan from year 1573 AD. It is recorded by Pitha Ram Guleria in Sujangarh Jat Samaj Nirdeshika, 2015, pp.5-7. It states that two Guleria brothers developed differences with the thakur of Ladariya in Didwana tahsil of Nagaur district in Rajasthan over the issue of Tax collection. They came near the border of Jodhpur State and founded Gulerion Ki Dhani in 1573 AD at present Sujangarh where there was good soil and drinking water. When their population increased the Guleria people changed the name hamlet to 'Kharbuji Dhani' after person named Kharbuji in 1723 AD. Later thakur of Sandwa Churu constructed a fort here and it was called Kot Kharbuja/Kharbuji Kot/Kharbuji Ra Kot.[8] Its name changed to Sujangarh after Sujan Singh who became ruler of Bikaner[9] in 1737 AD.[10]

It is matter of research how and when the Guleria people came from Kangra (Himachal Pradesh) to Ladariya in Didwana tahsil of Nagaur district in Rajasthan. It is likely that they migrated after the invasion of Mahmud of Ghazni (997 to 1030 AD).

इतिहास

कर्नल जेम्स टोड ने लेख किया है कि इनके अलावा तीन और विभाग थे - बागौर, खारी पट्टी और मोहिल। इन पर भी राठौड़ों का प्रभुत्व कायम हो गया था। राजपूत शाखाओं से छिने गए तीन विभाग राज्य के दक्षिण और पश्चिम में थे जिनका विवरण नीचे दिया गया है. [11]

अनुक्रमांक नाम जनपद नाम मुखिया गाँवों की संख्या राजधानी अधिकार में प्रमुख कस्बे
7. बागौर 300 बीकानेर, नाल, किला, राजासर, सतासर, छतरगढ़, रणधीसर, बीठनोक, भवानीपुर, जयमलसर इत्यादि।
8. मोहिल 140 छापर छापर, सांडण, हीरासर, गोपालपुर, चारवास, बीदासर, लाडनूँ, मलसीसर, खरबूजा कोट आदि
9. खारी पट्टी 30 नमक का जिला

मोहिल-महला-माहिल जाटवंश का इतिहास

दलीप सिंह अहलावत[12] लिखते हैं कि मोहिल जाटवंश राज्य के अधीन छापर राजधानी के अंतर्गत हीरासर एक परगना था।

मोहिल जाटवंश राज्य - मोहिल जाटवंश ने बीकानेर राज्य स्थापना से पूर्व छापर में जो बीकानेर से 70 मील पूर्व में है और सुजानगढ़ के उत्तर में द्रोणपुर में अपनी राजधानियां स्थापित कीं। इनकी ‘राणा’ पदवी थी। छापर नामक झील भी मोहिलों के राज्य में थी जहां काफी नमक बनता है। कर्नल जेम्स टॉड ने अपने इतिहास के पृ० 1126 खण्ड 2 में लिखा है कि “मोहिल वंश का 140 गांवों पर शासन था।

मोहिल वंश के अधीन 140 गांवों के जिले (परगने) - छापर (मोहिलों की राजधानी), हीरासर, गोपालपुर, चारवास, सांडण, बीदासर. लाडनू, मलसीसर, खरबूजाराकोट आदि। जोधा जी के पुत्र बीदा (बीका का भाई) ने मोहिलों पर आक्रमण किया और उनके राज्य को जीत लिया। मोहिल लोग बहुत प्राचीनकाल से अपने राज्य में रहा करते थे। पृ० 1123.


जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत, पृष्ठान्त-250


मोहिलों के अधीश्वर की यह भूमि माहिलवाटी कहलाती थी।” जोधपुर के इतिहास के अनुसार राव जोधा जी राठौर ने माहिलवाटी पर आक्रमण कर दिया। राणा अजीत माहिल और राणा बछुराज माहिल और उनके 145 साथी इस युद्ध में मारे गये। राव जोधा जी राठौर की विजय हुई। उसी समय मोहिल फतेहपुर, झुंझुनू, भटनेर और मेवाड़ की ओर चले गये। नरवद माहिल ने दिल्ली के बादशाह बहलोल लोधी (1451-89) से मदद मांगी। उधर जोधा जी के भाई कांधल के पुत्र बाघा के समर्थन का आश्वासन प्राप्त होने पर दिल्ली के बादशाह ने हिसार के सूबेदार सारंगखां को आदेश दिया कि वह माहिलों की मदद में द्रोणपुर पर आक्रमण कर दे। जोधपुर इतिहास के अनुसार कांधलपुत्र बाघा सभी गुप्त भेद जोधा जी को भेजता रहा। युद्ध होने पर 555 पठानों सहित सारंगखां परास्त हुआ और जोधा जी विजयी बने। कर्नल टॉड के अनुसार जोधा के पुत्र बीदा ने मोहिलवाटी पर विजय प्राप्त की। राव बीदा के पुत्र तेजसिंह ने इस विजय की स्मृतिस्वरूप बीदासर नामक नवीन राठौर राजधानी स्थापित की। तदन्तर यह ‘मोहिलवाटी’ ‘बीदावाटी’ के नाम से प्रसिद्ध की गई। इस प्रदेश पर बीदावत राजपूतों का पूर्ण अधिकार हो गया। राजपूतों ने इस प्राचीनकालीन मोहिलवंश को अल्पकालीन चौहानवंश की शाखा लिखने का प्रयत्न किया।[13] किन्तु इस वंश के जाट इस पराजय से बीकानेर को ही छोड़ गये।

सुजानगढ़ में प्रजा परिषद् की स्थापना

वर्ष 1942 में गांधीजी ने देश में करो या मरो का नारा दिया और अंग्रेजों को भारत छोड़ने का जय घोष किया। गांधीजी के सत्याग्रह से प्रोत्साहित होकर सुजानगढ़ में भी बीकानेर राज्य प्रजा परिषद् की स्थापना की। पंडित गिरीश चन्द्र मिश्र, सेठ सागरमल खेतान, बनवारीलाल बेदी, लालचंद जैन, फूलचंद जैन जैसे कार्यकर्त्ता शहरी तबके से थे।

ग्रामीण क्षेत्रों से जो कार्यकर्त्ता 1942 से 1945 तक बीकानेर राज्य प्रजा परिषद् सुजानगढ़ के सदस्य बनकर इस संघर्ष में सामिल हुए और अंग्रेजी साम्राज्य, बीकानेर की राजशाही एवं जागीरदारी प्रथा के विरुद्ध बिगुल बजाय उनमे से मुख्य थे -

जाट प्रजापति महायज्ञ सीकर सन 1934

जाट प्रजापति महायज्ञ सीकर सन 1934 ने किसानों में राजनैतिक चेतना का संचार किया। उस सम्मलेन में सुजानगढ़ तहसील से जिन किसानों ने भाग लिया उनमे मुख्य थे[14] -

आजाद भारत में सामंती अत्याचार

सन्दर्भ : भीमसिंह आर्य:जुल्म की कहानी किसान की जबानी (2006),p.53-54

सन 1947 में भारत आजाद हो गया था। इससे सामंतो को उनकी जागीर ख़त्म होने का डर सताने लगा। उन्होंने किसानों पर दमन चक्र तेज कर दिया। जागीरदारों के पास हतियार थे और राज्य की सेवा से अधिक हथियार मिल गए थे। वे अब डाकू बन गए और जागीरदारों के इशारों पर गाँव के किसानों पर डाका डालने लगे।

सुजानगढ़ तहसील के ज्याक गाँव में ईशरराम गोदारा के घर डाका पड़ा। स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी मानाराम बीडासर नि. भाषीणा के पिता पेमाराम बीडासर का डकैतों ने बाघसरा जागीरदार के इशारे पर अपहरण कर लिया। और मानाराम बीडासर को महीनों जयपुर में जाकर चौधरी कुम्भाराम आर्य के बंगले में छिपकर रहना पड़ा। डकैतों को जब बाघसरा के जागीरदार के मार्फत 500 रु. की फिरौती भेजी तभी 80 वर्ष के बूढ़े को छोड़ा गया।[15]

ईयारा के जागीरदार के इशारे पर अपने खेत में ऊंटनियाँ चरा रहे केशुराम लोहमरोड़ पर डकैतों ने हमला किया। केशुराम डकैतों की गोली से घायल हो गए तो उनकी तीन ऊंटनियाँ डकैत लेकर भाग गए।

कान्धलसर के केशरराम व शम्भूराम ढाका ग्राम बिलणियासर तहसील नोखा में बसते थे।

बिलणियासर के जागीरदार ने ग्राम के कुम्हारों, ढाकों, खीचड़ परिवारों पर हमले किये। एक कुम्हार शहीद हो गया। केशरराम ढाका तथा खीचड़ परिवारों को गाँव छोड़ कर आना पड़ा और वे सुजानगढ़ तहसील के ग्राम कान्धलसरनोडिया आदि में आकर आबाद हुए। खीचड़ तो जागीरदार के गिरफ्तार होने पर वापिस चले गए किन्तु केशरराम ढाका के पुत्र शम्भूराम ढाका आदि कान्धलसर में आबाद हैं, जो बीकानेर संसद रामेश्वर डूडी के सगे मामा हैं।

पन्नाराम मण्डा नि. ढींगसरी डाबडा आन्दोलन में मौत के मूंह से बाल-बाल बचे। वे डकैतों के हमलों में भी अनेकों बार सौभाग्य से ही बच पाए थे। उनके बड़े पुत्र की शादी में ग्राम कसुम्बी के जागीरदारों ने घोडी पर चढ़ने पर रोक लगा दी थी किन्तु बरात शस्त्रास्त्रों से लैस होकर गयी थी, इसलिए बच गए।

सुजानगढ़ जाट समाज निर्देशिका

सुजानगढ़ जाट समाज की निर्देशिका-2015

समाज सेवी सुजानगढ़ निवासी पीथाराम गुलेरिया ने अथक प्रयास से 'गुलेरिया सेवा संस्थान' के तत्वावधान में सुजानगढ़ में निवासरत सभी जाट परिवारों का डोर-टू-डोर सर्वे किया और उसके आधार पर सुजानगढ़ जाट समाज निर्देशिका का 20 अगस्त 2015 को प्रकाशन किया और सभी परिवारों को निशुल्क पहुंचाया। निर्देशिका के मुद्रण का भार विजयपाल चाहर पुत्र श्रवण कुमार चाहर द्वारा किया गया है। निर्देशिका में जाट समाज के 139 गोत्रों के परिवारों का पते सहित दूरभाष विवरण दिया गया है। निर्देशिका सभी जाट परिवारों को जोड़ने के लिए अत्यंत उपयोगी है। इस निर्देशिका में आमजन के लिए आवश्यक सूचनाएँ भी दी गई हैं। स्वास्थ्य संबंधी आयुर्वेदिक घरेलू उपचार भी दिये गए हैं। निर्देशिका में सुजानगढ़ का इतिहास भी दिया गया है।

सुजानगढ़ का इतिहास

सुजानगढ़ का यह इतिहास पीथाराम गुलेरिया, सुजानगढ़ जाट समाज निर्देशिका, 2015, पृ. 5-7, से साभार लिया गया है।

सुजानगढ़ के इतिहास में प्रथम आधार-शिला समाज के गुलेरिया गोत्र के पूर्वजों ने रखी थी। विक्रम संवत 1630 (=1573 ई.) में डीडवाना मोलासर के पास लादड़िया गांव से जाट गुलेरिया परिवार के दो भाईयों की ठाकुर के साथ लाग-बाग के संबंध में अनबन हो गई जिससे वे गाँव छोडकर निकल गए। ठाकुर ने यह दवाब बनाया कि जो लादड़िया गांव में रहेगा उसको ठाकुर की जय बोलनी पड़ेगी। इस संबंध में एक लोकोक्ति प्रचलित है - लादड़िया में रहीं जको जय ठाकुर की कहीं। स्वाभिमानी जाटों को यह मंजूर नहीं था सो बैल गाड़ियों में सामान डालकर अनजान स्थान के लिए रवाना हो गए। ठाकुर ने कहा कि जा तो रहे हो परंतु जोधपुर रियासत में नहीं बसने दूँगा। जसवंतगढ़ में आकर पूछा तो पता चला कि जोधपुर रियासत सामने पड़े ताल में समाप्त होती है। यह बिकानेर रियासत का इलाका था। यहीं गुलेरिया जाटों ने डेरा डाला। यह क्षेत्र मांडोता ठाकुर का बीदासर जागीर के अधीन था। ताल की बंजर जमीन जहां गुलेरिया जाट बसे वह वर्तमान गांधी चौक के इर्द-गिर्द थी।[16]

मांडोता गाँव के दयालदासोत मारवाड़ के समीप के गांवों में डाका डालकर आ जाते थे। गोपालपुरा और व मांडोता के आपस में अनबन चलती थी जिसके कारण चार परिवार क्रमस: बासनीवाल (प्रजापत), मेघवाल (मेहरड़ा), नाई (टोकसिया) और माली (सांखला) ये गुलेरियों की ढ़ाणी के पास आकार बस गए। जो 'पंच ढ़ाणी' के नाम से कहलाए। 'पंच ढ़ाणी' गैर आबाद थी तथा जोधपुर- बीकानेर रियासत की सीमा पर होने से बीकानेर महाराजा विशेष ध्यान रखते थे। कहते हैं की 'पंच ढ़ाणी' में भी जब लूट-पाट होने लगी तब बीदासर जाकर बताने पर बीकानेर महाराज की ओर से 'पंच ढ़ाणी' के पहरे पर चार घुड़सवार भिजवाए जो एक साल तक यहाँ रहे। सुरक्षा व खेती की उपजाऊ जमीन पर बीकानेर महाराजा का वृद्धहस्त देख कर आस-पास के गावों से लोग आकार बसने लगे। ताल की जमीन में 5-6 फुट खोदने पर मीठा पनी निकलता था जिससे सिंचाई कर दो फसल व सब्जी भी खूब होती थी। [17]

एक बार मांडोता के दयालदासोता मारवाड़ से लूट के साथ हकीम का हाथी लेकर आ गए, हाथी तो वापस लौटा दिया परंतु जोधपुर की सेना ने चढ़ाई कर दी। मांडोता, कालिया गाँव में घेरा डालकर लूट-पाट की जिसमें रंजिश के कारण गोपालपुरा ने भी साथ दिया तथा गांवों को जला दिया। इस प्रकार ठाकुर फतेहसिंह के हाथ से जागीर चली गई। इस झगड़े में फतेहसिंह व उनके 25 भाई बंधु और एक भाटी जुंझार सिंह ने वीरगती पाई। दयालदासोता के बचे परिवार को बीदासर ठाकुर ने कोडासर में बसाया तथा बीदासर की नौकरी में रहे। फतेहसिंह के साथ काम आए जुझार सिंह पर भी छतरी बनी जिसका पत्थर आज भी आई. टी. आई. कालेज में लगा है। इसके ठीक सामने संवत 1679 (1622 ई.) में महासती दयालदास आसकरणजोत सजना मोहिल पर छतरी बनवाई। मांडोता, कालिया गाँव इस झगड़े में बिलकुल मिट गए। इनके अवशेष अब भी खुदाई में मिलते हैं। दोनों गांवों के अधिकतर लोग 'पंच ढ़ाणी' में आकार बस गए। [18]

गुलेरिया परिवार के गुलोजी ने गुलेरिया गाँव बसाया। 'पंच ढ़ाणी' के गुलेरिया परिवार के भाई ने हरयाणा में खैर गाँव बसाया जहां आज 100 से ज्यादा गुलेरिया परिवार हैं। 'पंच ढ़ाणी' की आबादी बढने पर ख़रबुज़ी के नाम से संवत 1780 (1723 ई.) में ढ़ाणी का नाम ख़रबुज़ी रख दिया तथा लोग नया बाजार तक मुख्य सड़क पर बस गए। सांडवा ठाकुर ने यहाँ पर एक गढ़ बनवाया तब इसका नाम ख़रबुज़ी कोट या ख़रबूज़ी रा कोट हो गया। [19]

मीठा पानी और अच्छी खेती के कारण संवत 1797 (1740 ई.) में गुलेरिया परिवार के भांजे राजियासर गाँव से बिजारणिया परिवार को बसाया। संवत 1816 (1759 ई.) में दूसरे भांजे खीचड़ परिवार को निबी जोधा से लाकर बसाया। [20]

संवत 1808 (1751 ई.) में सेवाराम गुलेरिया का देहांत हुआ तब उनकी पत्नी सती हुई जो आज एफ.सी.आई. गोदाम के पास सती मंदिर है। वर्ष 1969 में जब एफ.सी.आई. का निर्माण हुआ तो उस समय सतीमाता के मंदिर के लिए स्थान नहीं छोडने के कारण निर्माण अवरूद्ध हो गया तब एफ.सी.आई. ने मंदिर के लिए अलग स्थान छोडकर निर्माण करवाया। [21]

विक्रम संवत 1545 (1488 ई.) में बीकानेर रियासत की स्थापना राव बिकाजी ने पाण्डू गोदारा से राज तिलक करवाकर नेराजी जाट की भूमि पर बीकानेर नाम से राजधानी स्थापित की। मूलस्थान नेराजी का होने से राजधानी का नाम बिकानेर हुआ। महाराजा सूरतसिंह बीकानेर ने सांडवा ठाकुर से ख़रबूज़ी कोट ले लिया जिसके बदले दूसरी भूमि देदी। संवत 1835 (1778 ई.) में सुजानसिंह के नाम से गाँव का नाम सुजानगढ़ रखा गया। इसी संवत के आस पास नाथोजी गुलेरिया ने पशुओं के पीने के लिए नाथो तालाब खुदवाया।[22]

संवत 1879 (1822 ई.) में राज्य ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ जुडने से अङ्ग्रेज़ी सरकार की मदद से जागीरदारों के आतंक से मुक्त करने के लिए सुजानगढ़ में अङ्ग्रेज़ी रेजीमेंट शेखावाटी ब्रिगेड रहने लगी। बीदासर व अन्य जागीरदारों को दबाने के लिए कई बार सेना भी भेजी। इस बदलती परिस्थिति में सुजानगढ़ सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण स्थान बन गया। जिसका नतीजा यह हुआ कि आस-पास के गांवों से लोग आकार बसे। महाराजा डूंगरसिंह ने राजाजी की कोठी बनाकर सुजानगढ़ को निजामत बना दिया। जोधपुर सीमा पर स्थित होने से राजनैतिक और व्यापारिक महत्व बढ़ गया जिससे इर्द-गिर्द के गांवों से बनिए यथा जजोदिया, मंगलूणिया, फतेहपुरिया, शोभासरिया, सेठिया आदि भी आकर व्यापार करने लगे। ख़रबूज़ी कोट व सुजानगढ़ हमेशा ही खालसा रहा जिस पर बीकानेर दरबार का सीधा नियंत्रण था। कोई जागीरदार नियुक्त नहीं थे। यहाँ के चौधरी ही लाग-बाग इकट्ठी कर राज दरबार को भिजवाते थे। [23]

Jat Gotras

Pitha Ram Guleria, Guleria Sewa Sansthan, Sujangarh, did a a door-door survey of Jat families living in Sujangarh. Based on these data he published on 20 August 2015 a Directory of individual Jat members, clan wise with localities and Phone numbers, under the title 'Sujangarh Jat Samaj Nirdeshika'. There are Total 1363 Jat families residing in Sujangarh town. Gotra wise list with no. of their families is given in the following table:

Major Jat Gotra in Sujangarh city is Guleria 153 families followed by Bijarnia 125 families and Godara 87 families. Jat Gotras in decreasing order of population are:

Jat Monuments

Jat Mandir Sujangarh

गुलेरिया परिवार का एक भाई सुजानगढ़ से जाकर सालासर बस गए बाकि जाट मंदिर के पास बस गए। विक्रम संवत 1935 में दुलिया गाँव से कृष्ण की मूर्ति लाकर जाट मंदिर बनाया।[24]

Villages in Sujangarh tahsil

Abasar, Aidanpura, Amarsar, Ankholyan, Asarsar, Badhsar, Baghsara Aguna, Baghsara Athuna, Bairasar, Balera, Bamaniya, Bamboo, Bara, Badabar, Basi Agooni, Basiathuni, Beer Chhapar, Benatha Jogliya, Benatha Umji, Bhagiwad, Bhanisar Harawatan, Bhanisar Tejsinghotan, Bhaseena, Bheenwsar, Bhojlai, Bhom Bobasar, Bhom Gondusar, Bhom Jyak, Bhom Nabbasar, Bhom Parewara, Bhom Telap, Bhomiyara, Bhomsadoo, Bidas, Bidasar, Bilanga, Bilasi, Bobasar Bidawatan, Bobasar Charnan, Bothiyabas, Chadwas, Chak Ghantiyal, Chak Kalia, Chak Rajiyasar, Charia, Charla, Chhapar, Chuhas, Dewani, Dhadheru Bhamuwan, Dhadheru Godaran, Dhakawali, Dhani Charnan, Dhani Kumharan, Dhatri, Dhigariya, Dhoran Ki Dhani, Dungras Agoona, Dungras Athoona, Dunkar, Ganora, Gedap, Gewarsar, Ghantiyal Bari, Ghantiyal Chhoti, Ghotra, Gondusar, Gondusar Narnotan, Gopalpura, Gudabari, Guleriya, Harasar, Hemasar Agoona, Hemasar Athoona, Iyara, Jaitasar, Jeeli, Jindrasar, Jogalsar, Jogliya, Jyak, Kaleron Ki Dhani, Kalyansar, Kandhalsar, Kanoota, Karejra, Katar Bari, Katar Chhoti, Khadaya, Khaliya, Khara, Khariya Bara, Khariya Chhota, Khariya Kaniram, Khoran, Khuri, Kodasar Bidawatan, Kodasar Jatan, Kolasar, Lalgarh, Lalpura, Likhmansar, Lodsar, Lona, Luhara, Magrasar, Malaksar, Malasar, Malasi, Malsisar, Mangalwasi, Marothiya, Meegna, Mundra, Murdakiya, Nabbasar, Neemri Bidawatan, Neemri Charnan, Nodiya, Norangsar, Nyama, Palas, Parawa, Parewara, Parwatisar, Rajiyasar Khara, Rajiyasar Meetha, Rajpura, Rampur, Randhisar, Ranwan Ki Dhani, Rawali Dhani, Reda, Roopeli, Sadoo Bari, Sadoo Chhoti, Sajansar, Salasar, Sandan, Sandwa, Sarangsar, Sarothiya, Shobhasar, Siwaron Ki Dhani, Soniyasar Sukhram, Soniyasar Udaikarnawtan, Soorwas, Sujangarh, Tada, Telap, Ten Desar, Tharda, Toliyasar, Udasar, Udwala, Untalad, Upadhiya,

Notable persons

  • Pitha Ram Guleria - Social worker and Retd. Accounts Officer. Address: Pragati Nagar, Behind Petrol Pump, Sujangarh, Churu, Rajasthan. PIN:331507, Mob: 9460075841, 7742775427
  • Hanuman Mal Dhaka - RAS Rajasthan. Present Address : Near Jat Temple, Sujangarh, Churu, Rajasthan
  • B. L. Guleria - DEO State Excise Deptt, DOB. : 13.2.1953. Jat Temple, Sujangarh, Churu, Present Address : B-136, Tara Marg, Hanuman Nagar, Jaipur, Phone: 0141-2351350, Mob: 9829051321.
  • Hukmi Chand Godara - RAS, Sujangarh, [25]
  • Ganesha Ram Jakhar - District Excise Officer, Sujangarh, [26]
  • Sagar Mal Tholia - Deputy Commissioner Sales Tax, Sujangarh, [27]
  • Bhanwar Lal Saran - ACF, Forest, Sujangarh, [28]
  • Ramniwas Veer - ACTO, Sujangarh, [29]
  • Tejpal Guleria - DSP, RPS, Sujangarh, [30]
  • Ram Chandra Moond - DSP, RPS, Sujangarh, [31]
  • Raj Kumar Chaudhary - Circle Officer Police. Mob- 9837321746
  • Poonam Jhajharia - Sujangarh, President, Sonadevi Sethia Kanya Mahavidyalay Sujangarh
  • Nikita Jandu - Sujangarh, Vice President, Sonadevi Sethia Kanya Mahavidyalay Sujangarh
  • Mahendra Godara - Village:Sujla (Sujangarh), Vice President, Govt Mahavidyalay Sujla Sujangarh
  • Ashok Chaudhari (Balan) - From Sujangarh, Rajasthan, Presently at Surat, Gujarat, Mob:09173363303
  • Chaina Ram Burdak - Sonia Garment , Sujangarh, Mob: 9785823170. [32]
  • Bhim Singh Arya (Khichar) - From Khichar Colony, Sujangarh, Social worker and Freedom fighter, Leading person in establishing Kisan Chhatrawas Sujangarh, Author of 'Julm Ki Kahani Kisan Ki Jubani', Awarded with Jat Siromani.[38]
  • Dhanna Ram Khichar - धन्नाराम खीचड़ - जन्म - सुजानगढ़, द्वितीय महायुद्ध में भारतीय स्थल सेना के योद्धा और बर्मा, सिंगापुर, मलाया, और हिंदेशिया के मोर्चों पर जापानी सेना के विरुद्ध लड़े, 83 वर्ष अवस्था, सामाजिक कार्यों में रूचि। पुस्तक 'जुल्म की कहानी किसान की जबानी' प्रकाशन के विशेष सहयोगी और प्रेरक।
  • कुंभाराम बिशु - अपर लोक अभियोजक, राजकीय अभिभाषक,सुजानगढ़. Mob:9460674607.[39]
  • कु स्वाति दूधवाल - प्रगतिनगर, सुजानगढ़, अंतर्राष्ट्रीय तीरंदाजी में हुये जुलाई 2013 एसियन ग्रांड विश्वकप में रजत पदक.[40]
  • कु कोमल ढाका - प्रगतिनगर, सुजानगढ़, उच्च माध्यमिक परीक्षा कलावर्ग में 92 प्रतिशत अंक अर्जित कर जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया ,वर्ष 2014-2015.[41]
  • भारत विशु - पुत्र भगवनारम, प्रगतिनगर, सुजानगढ़, माध्यमिक परीक्षा में 95.50 प्रतिशत अंक प्राप्त कर जिले में 6 ठा स्थान और सुजानगढ़ जाट समाज में प्रथम स्थान, वर्ष 2014-2015
  • विजयपाल चाहर - पुत्र श्रवण कुमार चाहर, भोजलाई चौराहा, सालासर रोड, सुजानगढ़, जाट समाज निर्देशिका 2015 के मुद्रण के लिए आर्थिक सहयोग करने वाले भामाशाह
  • Kuldeep Jakhar: IRS (C& CE) 2014 batch, Place- Sujangarh, M: 9818500439
  • Kachnar Chaudhary (Bhadala) - एथलेटिक्स में नेशनल रिकॉर्ड बनाने वाली एथलीट कचनार चौधरी

गार्गी पुरस्कार से सम्मानित मेधावी छात्राएं

External links

See also

References

  1. Dr. Raghavendra Singh Manohar:Rajasthan Ke Prachin Nagar Aur Kasbe, 2010,p. 237
  2. (See Sakrai inscription of s.v. 1155).
  3. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter III,p.250
  4. Pitha Ram Guleria, Sujangarh Jat Samaj Nirdeshika, 2015, p. 5
  5. James Todd Annals, Vol 1, p.146
  6. Churu Janpad Ka Jat Itihas by Daulat Ram Saran Dalman
  7. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter III, p. 250
  8. Pitha Ram Guleria, Sujangarh Jat Samaj Nirdeshika, 2015, p. 5
  9. James Todd Annals, Vol 1, p.146
  10. Churu Janpad Ka Jat Itihas by Daulat Ram Saran Dalman
  11. कर्नल जेम्स टोड कृत राजस्थान का इतिहास, अनुवाद कालूराम शर्मा,श्याम प्रकाशन, जयपुर, 2013, पृ.402-403
  12. जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत, पृष्ठ-250,251
  13. जाटों का उत्कर्ष, 337-338 लेखक योगेन्द्रपाल शास्त्री; जाट इतिहास उर्दू पृ० 378-380, लेखक ठा० संसारसिंह।
  14. भीमसिंह आर्य:जुल्म की कहानी किसान की जबानी (2006),p.35
  15. भीमसिंह आर्य:जुल्म की कहानी किसान की जबानी (2006),p.53
  16. पीथाराम गुलेरिया, सुजानगढ़ जाट समाज निर्देशिका, 2015, पृ. 5
  17. पीथाराम गुलेरिया, सुजानगढ़ जाट समाज निर्देशिका, 2015, पृ. 5
  18. पीथाराम गुलेरिया, सुजानगढ़ जाट समाज निर्देशिका, 2015, पृ. 5
  19. पीथाराम गुलेरिया, सुजानगढ़ जाट समाज निर्देशिका, 2015, पृ. 6
  20. पीथाराम गुलेरिया, सुजानगढ़ जाट समाज निर्देशिका, 2015, पृ. 6
  21. पीथाराम गुलेरिया, सुजानगढ़ जाट समाज निर्देशिका, 2015, पृ. 6
  22. पीथाराम गुलेरिया, सुजानगढ़ जाट समाज निर्देशिका, 2015, पृ. 6
  23. पीथाराम गुलेरिया, सुजानगढ़ जाट समाज निर्देशिका, 2015, पृ. 6
  24. पीथाराम गुलेरिया, सुजानगढ़ जाट समाज निर्देशिका, 2015, पृ. 7
  25. Pitha Ram Guleria, Sujangarh Jat Samaj Nirdeshika, 2015, p.80
  26. Pitha Ram Guleria, Sujangarh Jat Samaj Nirdeshika, 2015, p.80
  27. Pitha Ram Guleria, Sujangarh Jat Samaj Nirdeshika, 2015, p.80
  28. Pitha Ram Guleria, Sujangarh Jat Samaj Nirdeshika, 2015, p.81
  29. Pitha Ram Guleria, Sujangarh Jat Samaj Nirdeshika, 2015, p.81
  30. Pitha Ram Guleria, Sujangarh Jat Samaj Nirdeshika, 2015, p.82
  31. Pitha Ram Guleria, Sujangarh Jat Samaj Nirdeshika, 2015, p.82
  32. Pitha Ram Guleria, Sujangarh Jat Samaj Nirdeshika, 2015, p.90
  33. Sanjay Singh Saharan, Dharati Putra: Jat Baudhik evam Pratibha Samman Samaroh Sahwa, Smarika 30 December 2012, by Jat Kirti Sansthan Churu, pp.11-12
  34. Sanjay Singh Saharan, Dharati Putra: Jat Baudhik evam Pratibha Samman Samaroh Sahwa, Smarika 30 December 2012, by Jat Kirti Sansthan Churu, pp.11-12
  35. Sanjay Singh Saharan, Dharati Putra: Jat Baudhik evam Pratibha Samman Samaroh Sahwa, Smarika 30 December 2012, by Jat Kirti Sansthan Churu, pp.11-12
  36. Sanjay Singh Saharan, Dharati Putra: Jat Baudhik evam Pratibha Samman Samaroh Sahwa, Smarika 30 December 2012, by Jat Kirti Sansthan Churu, pp.11-12
  37. Sanjay Singh Saharan, Dharati Putra: Jat Baudhik evam Pratibha Samman Samaroh Sahwa, Smarika 30 December 2012, by Jat Kirti Sansthan Churu, pp.11-12
  38. उद्देश्य:जाट कीर्ति संस्थान चूरू द्वारा आयोजित सर्व समाज बौधिक एवं प्रतिभा सम्मान समारोह चूरू, 9 जनवरी 2013,पृ. 77
  39. Pitha Ram Guleria, Sujangarh Jat Samaj Nirdeshika, 2015, p.78
  40. Pitha Ram Guleria, Sujangarh Jat Samaj Nirdeshika, 2015, p.78
  41. Pitha Ram Guleria, Sujangarh Jat Samaj Nirdeshika, 2015, p.78

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